बदनसीबी

तकदीरें जो साथ न दे तो मेहनत सारी बेकार जाती है
वक्त सही ना हो तो किस्मत जीती बाजी हार जाती है

जब भी मंजिल करीब आती है, रास्ते उखाड़ जाती है
मेरी हर कामयाबी ये मेरी किस्मत ही बिगाड़ जाती है

ना जाने इसको क्या पसंद आया है मेरे इन हाथों में जो
ये बदनसीबी भी मेरी लकीरों से कभी कभार जाती है

जब चलती है मुफलिसी भरी नाकामयाबी की आंधिया
तो मेहनत के बने घरौंदे एक झटके में उजाड़ जाती है

जो ये साथ ना दे तो बादशाहों को फकीर बना देती ह
जो किस्मत साथ दे तो मज़लूमों को भी सवार जाती है

न जाने किसकी बद्दुआ शामिल है,हाथों की लकीरों में
कबूल होने से पहले ही दुआ औरों पर निसार हो जाती है


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