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हमको क्या बताना है

ये काजल ये,लाली, ये बिंदिया,  ये सब  तो बस बहाना है वो सादगी में सामने आ जाए तो भी दिल उसी पे आना है नजर  मिलते  ही  सफर ए आवारगी पर निकल पड़ता है कमबख्त  मेरे  इस  दिल  का  ये  मसला  बड़ा  पुराना  है यूं बातों ही बातों में  मुस्कुराने का  सबब क्या पूछें इलाही लगता  है  आज  फिर  उनको  कोई राज हमसे छुपाना है एक शब हाथों पे हाथ रखके उन्होंने हाल पूछा था हमारा अब कोई बताए हमें, की जवाब में  हमको क्या बताना है ये नशा ए मोहब्बत भी अजीब मोड़ पे ले आई  है हमको न तो दिल को चैन आता है, और न ही उनसे दूर जाना है मायूस होता था जिनपे, दिल उन हालातों में मुस्कुराता है इश्क की ये आखिरी रस्म है बावरे,  इसी तरह निभाना है कोई दिल्लगी का खेल नहीं,  ये इश्क़  वो  आग है साहेब ना  तो  इसको  बुझाना है, और ना ही खुलकर जलाना है चाहत उसी मंजिल की है, वहां लौट के भी नहीं आना है दिल तुझे ना खुद सुकूँ से रहना है, ना मुझे चैन  आना है

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सभी के भी दिलों में रहा करो

पर रातों जैसी अब रातें नहीं होती

अपने यार बदल देती है

झूठों को झुठलाए क्या

उसको जार ए चमन लिखा है

तुझको सुकून लिख, मै दहकती कोई आग बन जाऊंगा

पाल रखा है

मैने जब तक उसको देखा

कौन जाने

इकलौता खजाना हो