छूने की गुजारिश आ जाए
सावन आने से पहले ही सावन की सिफारिश आ जाए पानी की बूंदे बन कर , तुझे छूने की गुजारिश आ जाए ये बादल,ये मौसम, ये बिजली से हमको तवक्को नहीं हा,तुम जो अपना आंचल लहरा दो तो बारिश आ जाए तेरी आंखों में भी रिवाजों से बगावत साजिश आ जाए काश तुझमें भी मुझ सी शरारत की ख्वाहिश आ जाए छोड़ कर पीछे रिवाज ए कायनात की रस्मों को इलाही तेरे भी दिल मे हद से बेहद तक कि फरमाइश आ जाए ना तू देखे दुनिया की कसमों को,न मै देखूं इन रस्मों को बस तू हो, मै हूं, और बारिशों की नवाज़िश आ जाए तेरे आने की खबर से ये बौराया फिर रहा है बावरें जो तू आए तो फिर दिल में सुकूं की रिहाइश आ जा