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रिश्तों को भी अंजान बना डाला

बनाया  था  जिसको  इंसान, उसे हैवान बना डाला कुर्सी  के  गिद्धों  ने  रिश्तों को  अनजान बना डाला कल तक तरसते थे जिसकी तालीम को ये जाहिल आज उस खान सर को भी फ़ैसल खान बना डाला चराग़ ए तालीम बनके  रोशन किया जिसने सबको उस रोशनी को भी हमने हिंदू मुसलमान बना डाला तारीखों की किताबों से कहां सबक लेते है ये नादां  इन्होंने ज़ख्म ए कल को आज का वरदान बना डाला अमृत कलश लिए धन्वन्तरि बनके प्रकट हुए थे जो उन्होंने अब घर घर में कब्रिस्तान,श्मशान बना डाला रूह तक  जो  बेंच  आए  है सिक्कों की खनक पर अब अपने  जमीर  को हाट  का  सामान बना डाला

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कोई बहाना बना दे

छूने की गुजारिश आ जाए

मुझ माही से मिलने आज मेरा आब आए,

हमको क्या बताना है

सभी के भी दिलों में रहा करो

पर रातों जैसी अब रातें नहीं होती

अपने यार बदल देती है

झूठों को झुठलाए क्या

उसको जार ए चमन लिखा है

तुझको सुकून लिख, मै दहकती कोई आग बन जाऊंगा