तस्वीर लगा देना
छू कर पैमानों को पैमाने से, तकदीर जगा देना रिंदों की मजलिस में मेरी भी तस्वीर लगा देना जो बात आये पीने की, तो मैखाने भी पी जाऊ बस बोतल पर तुम उसकी तस्वीर लगा देना कुछ लकीरें हो मेरे भी नाम की उनके हाथों में मेरे खुदा बस इतनी सी मेरी तकदीर बना देना शाम के वक्त बैठना जहां मुनासिब हो रिंदों में शहर में ऐसे दो चार मोहल्ले तामीर करा देना न दौलत की तमन्ना है, न शोहरत की तमन्ना है जहाँ बैठकर पी सकूं, ऐसी एक जागीर बना देना गर बात चले इबारत ए हुस्न बनाने की कही पर तुम अपनी परछाई भेज कर नई नजीर बना देना