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जो हम दोनों ने मांगा था

काश  कि तुम वैसे होते जैसा हमने सोचा था तो हम भी वैसे ही होते, जैसा तुमने चाहा था न तुम्हे  कोई गिला होती, न हमें कोई शिकवा मिलता दोनों को वो, जो हम दोनों ने मांगा था ना कोई बंदिश आई, न पीछे पड़ा जमाना था फिर कैसे मानूं , बिछड़न वक्त का तकाज़ा था ना रिश्ते खामोश होते, न ये दीवारे यूं चीखती  न चाँद झूठा होता, न उससे चांदनी यूं रूठती मुकम्मल करती जो तुम अपने किये वादे सब  तो  हमारी कहानी  आज  यूं अधूरी ना छूटती माना , अधूरा ही रहना था अपनी कहानी को पर रिश्तों की ये  डोर यूं उलझ कर  ना टूटती

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रिश्तों को भी अंजान बना डाला

कोई बहाना बना दे

छूने की गुजारिश आ जाए

मुझ माही से मिलने आज मेरा आब आए,

हमको क्या बताना है

सभी के भी दिलों में रहा करो

पर रातों जैसी अब रातें नहीं होती

अपने यार बदल देती है

झूठों को झुठलाए क्या

उसको जार ए चमन लिखा है