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छूने की गुजारिश आ जाए

सावन आने से पहले ही सावन की सिफारिश आ जाए पानी की बूंदे बन कर , तुझे छूने की गुजारिश आ जाए  ये बादल,ये मौसम, ये बिजली  से हमको तवक्को नहीं हा,तुम जो अपना आंचल लहरा दो तो बारिश आ जाए तेरी आंखों में भी रिवाजों से  बगावत  साजिश आ जाए  काश तुझमें भी मुझ सी शरारत  की  ख्वाहिश आ जाए छोड़ कर पीछे रिवाज ए कायनात की  रस्मों को इलाही तेरे भी दिल मे हद से बेहद तक कि  फरमाइश आ जाए ना तू देखे दुनिया की कसमों को,न मै देखूं इन  रस्मों को बस तू हो, मै हूं, और  बारिशों  की  नवाज़िश  आ  जाए  तेरे  आने  की  खबर  से  ये  बौराया  फिर  रहा है बावरें  जो तू  आए तो  फिर दिल में सुकूं की  रिहाइश आ जा

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मुझ माही से मिलने आज मेरा आब आए,

हमको क्या बताना है

सभी के भी दिलों में रहा करो

पर रातों जैसी अब रातें नहीं होती

अपने यार बदल देती है

झूठों को झुठलाए क्या

उसको जार ए चमन लिखा है

तुझको सुकून लिख, मै दहकती कोई आग बन जाऊंगा

पाल रखा है

मैने जब तक उसको देखा