मजहब और सियासत
ना हिन्दू खतरे में है और ना मुसलमान खतरे में है
सिर्फ धर्म के फिरकापरस्तों की दुकान खतरे में है
दंगा फसादों और मजहबी नफरतो से चलने वाली
इन दंगाइयों की कमाई के सारे सामान ख़तरे में है
मजहब को इंसानियत से भी बड़ा समझने वालों
गौर से देखो हमारे इस वतन का ईमान खतरे में है
मत तोड़ो इसको नफरतो के हथौड़े चलाकर तुम
तेरे हिन्दू मुसलमान बनने से हिंदुस्तान खतरे में है
जानवरो से नफरत और मोहब्बत हद से ज्यादा है
तुम्हारी इस बेमतलबी आदत से इंसान खतरे में है
मत बाटों मुल्क को इस बनाई मजहबी सरहदों में कोई मजहब नही, हमारा ये जहान खतरे में है
मत बोवो इस चमन में नफरती और मजहबी पौधे
हमे मालूम है इन फूलों से ये गुलिस्तान खतरे में है
नफरत की आंधिया उजाड़ देती है हर घरौंदे को
रोक लो इनको, इनसे तुम्हारा बागवान खतरे में है
न गोडसे का बिगड़ेगा न कसाब मातम मनाएगा
इस आग से गांधी और भगत का नाम खतरे में है
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