नीलाम

कभी उगता सूरज,  कभी ढलती शाम हो जाते है
मोहब्बत खरीदने वाले अक्सर नीलाम हो जाते है

या अच्छे  रहो या बुरे रहो, बस खबर में बने रहो
लोगो की  परवाह करने वाले गुमनाम हो जाते है

प्रीतम पे सब कुर्बान  करने  वाली राधा बनती है
जो  फ़र्ज़  पर  राधा छोड़ दे वो श्याम हो जाते है

खुद को जलाना पड़ता है बुजुर्गो की ख्वाहिश पे
ऐसे  ही  नही  लोग  बनवासी   राम  हो  जाते है

ये बेहद जरूरी है कि अपनी आवाज बुलंद रखो
खामोश  रहने  वाले  अक्सर  बदनाम हो जाते है

शुरू शुरू  में  जो  दिल  के बेहद अजीज होते है
बाद में वही महबूब दिल के बस झाम हो जाते है

ये चुनाव भी खुद में क्या  अजीब खेल है साहब
पहले जो राजा होते है बाद में अवाम हो जाते है

ये क्या फलसफ़ा है जो रोज नया महबूब बनाने हो
हमने तो जब भी कोसिस किया नाकाम हो जाते है

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