नवाजिश

एक चमकीला नूर देखा है माँ तेरे पैरों की उड़ती धूल में
ये तो वो जन्नत है जहाँ परवर दिगार को भी राहत मिली

जीते जी दौलत इज़्ज़त शोहरत सब मुझको माँ ने दिया
मरने पर जन्नत भी मुझे माँ के दुआओ की बदौलत मिली

बड़ी नवाजिश से मांगा तब मेरे लफ्जो में ये कुदरत मिली
बहुत खामोश रहा हूँ फिर मुझे बोलने की ये ताकत मिली

तमाम उम्र बस हम सुनते रहे इस शहर के सारे शोर गुल
अब आकर हमे कुछ अपनी भी कहने की फुरसत मिली

बहुत जलाया है हमने पैरों को इस धूप में चल चल कर
ईमान में मेहनतकशी निभाई तब जाकर ये बरकत मिली

तेरी मोहब्बत तो साबित हुई मेरे लिए घाटे का एक सौदा
न मुनाफे की आस दिखी न ही दिल्लगी की लागत मिली

जितना हमने बनाया उसका एक हिस्सा भी हमे न मिला
तेरे पूरे शहर को बसाया हमने,बदले में हमे हिजरत मिली

तमाम दुनियां ने खूब नवाजा मेरी इस काबिलियत को
मेरे हुनर का तुम्हारे ही बाजार में नही कोई कीमत मिली

बहुत चर्चे सुनकर हम भी तेरे दरवाजे पर चले आये है
हमको तो तुम्हारी महफ़िल में खुशियों की किल्लत मिली

दौलत और सूरत के कद्रदान मुझे दोजख में नज़र आये
जिसने भी सीरत की कद्र की उन्हें खुदा की जन्नत मिली

तुम्हारे बड़े से महल में लगे सारे आईने दागदार निकले है
इनके काले रंगों में देखा जो तो यहाँ है तेरी नियत मिली 

जो तुझे खुदा को पाना है तो किसी गरीब का सजदा कर
हमे अमीरो के घर दौलत तो गरीबो के घर कुदरत मिली

तमाम उम्र हम तरसते रहे उनके आगोश में आने के लिए
कब्र पहुँचे तो उस आँचल में सर रखने की इजाज़त मिली

शिकस्त खाकर टूट गए मैदान ए जंग में दुश्मनों से हम
बंद आंखों से माँ को याद किया तो लड़ने की हिम्मत मिली






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