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पर रातों जैसी अब रातें नहीं होती

अपने यार बदल देती है

झूठों को झुठलाए क्या

उसको जार ए चमन लिखा है

तुझको सुकून लिख, मै दहकती कोई आग बन जाऊंगा

पाल रखा है

मैने जब तक उसको देखा

कौन जाने

इकलौता खजाना हो

मेरी राधा

राम बन गए हो तुम