मैने जब तक उसको देखा
मैंने जब तक उसको देखा तब तक मेरी सांस चली
हुस्न ए जाना और भी थी पर हर सब तेरी बात चली
नही खबर मुझको अब तो चन्दा कब आये कब जाए
जब तक तेरी जुल्फों में था तब तक मेरी रात चली
पहले नज़रो से घायल करना बाद में उसका मुस्काना
दिल्लगी से दिलकशी की ऐसी कुछ शुरुआत चली
उसकी आंखे , उसकी बातें ,उसकी आने की सौगाते
पहले तो वो मुस्काइ ,फिर हौले हौले ये बरसात चली
जब तक थी वो महफिल में, हमपे नूरे सौगात चली
इनायत मिलती रही हरदम किस्मत भी मेरे साथ चली
नजर न लग जाए जमाने को हमारी जानिब का
इसलिए बस आँखों आंखों में ही सारी बात चली

Comments
Post a Comment