पाल रखा है

बेफजूल सी  बिसरी  कुछ  यादों  को  पाल रखा है
हमने हकीकत के दौर  में  ख्वाबों  को पाल रखा है

अब हमको दुश्मनों  की  जरूरत ही क्या है इलाही
हमने कितने बिच्छू,  कितने सांपों को पाल रखा है


उन्होंने भी इश्के वफ़ा के अरमानों को पाल रखा है
जिन्होंने इश्क के नाम पर  दुकानों को पाल रखा है

जो सबब पूछते लगे है कुछ लोग इस खामोशी का
कोई कहो उसे, इसमें मैने तूफानों को पाल रखा है


तंगदिल वालों ने इश्क  के उजालो  को पाल रखा है
दिलकशी और दिल्लगी के ख्यालों को पाल रखा है

जो बोल दूं तो कलेजा जल जाए जमाने का इलाही
इस सीने में हमने कुछ ऐसे सवालों को पाल रखा है





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