अपने यार बदल देती है
जरूरतों के साथ वो रक़ीबों के मेयार बदल देती है
मतलब जो निकले तो अपना परिवार बदल देती है
इतनी जल्दी कोई कपड़े भी नहीं बदलता इलाही
जितनी जल्दी वो बिस्तर पे अपने यार बदल देती है
उधार लिए खुशियों पे तो खूब इतराया करती है वो
जो बारी आए लौटाने की तो किरदार बदल देती है
खूब आता है उसे अदाएं दिखा कर दौलत लूटना
तख्त का सपना दिखाके, खुद दरबार बदल देती है
आज इसके,कल उसके,परसो किसी और के साथ
लोग कैलेंडर बदलते है वो लड़की यार बदल देती है
अब खुदा बचाए उसे, जो हमसफर बनेगा उसका
दौलत की भूखी ये दूसरों के घर बार बदल देती है
दौलतपरस्त , जालसाज, फरेबी है तबियत उसकी
वो दौलतमंद देख कर अपना श्रृंगार बदल देती है

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