तुझको सुकून लिख, मै दहकती कोई आग बन जाऊंगा
तुझको सुकून लिख, मै दहकती कोई आग बन जाऊंगा
तेरी ख्वाहिश को सच लिख, मै बिखरा खाब बन जाऊंगा
जो जोर चला मेरी कलम का तेरी हाथों की लकीरों पर
तुझको गंगा सी पावन लिख,मै कोई तालाब बन जाऊंगा
तेरी आंखों को मैखाना लिख,मै बहती शराब बन जाऊंगा
तुझको आसमां लिख,मै चमकता आफताब बन जाऊंगा
तू गुलों की रंग वो बू ले आना, मै पतझड़ के बाग लाउंगा
तू लबों से जो कह दे , मै वही गुनगुनाता राग बन जाऊंगा
तुझ पर लिखे सारे मुकम्मल गजलों को समेट कर
मैं तेरे कमरे में रखी कोई पुरानी किताब बन जाऊंगा
तू ग़मो की टोकरी लाना, मै खुशियों का कश्कोल लाउंगा
अपनी हँसी को तेरी जागीर लिख,मैं अजाब बन जाऊंगा

Comments
Post a Comment