झूठों को झुठलाए क्या
आँख के इन बहरों को सच और झूठ बताए क्या
अब झूठो के सामने हम झूठों को झुठलाए क्या
सुना,खुद को रहनुमा बताने लगे हो मुसाहिबो में
बड़े आईने है यहाँ दो चार तुमको भी दिखाए क्या
अंदाजा है शहर के लोगों को यहाँ पहले से ही
तुम्हारी कारस्तानियां हम सबको गिनाए क्या
ल
तुम्हारे यारो के किस्से छपते है हमारे अखबार में
अब तुम्ही बताओ हम बताये क्या, छुपाये क्या
नए बरस के नए नए कारनामे सबसे छुपाएं क्या
तुम्हारी तरह अब हम भी झूठी कसमें खाये क्या
माना कि थोड़ी मुफलिसी लिखी है इन लकीरों में
चंद दौलत पर तुमसा जमीर वमीर बेच खायें क्या

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