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मोहन के मोह पे मोहाए गई राधिका

सीने में दबाए बैठा हूं

जिस्म से जान निकल जाए

रोशनी करने को

शराफत नही आती

रोशनाई किया करो

मोहब्बत होने से रही

हिचकी की खुराफात

मेरी अंजुरी

संगेमरमर हो गए

कांच सा जमीं पर बिखर जाऊँ मैं