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कांग्रेस ने इन दोनों नेताओं को उनकी मेहनत का फल न देकर दो ऐसे लोगो को दिया जिनके नाम पर वोट ही नही पड़े। अगर निष्पक्षता से देखा जाए तो सिंधिया और पायलट दोनो ने सिर्फ अपने अपमान का बदला लिया है। इनके राजनीतिक दलगत बदलाव को मैं गलत नही मानता। क्योकि सरकार आने के बाद इन दोनों ही नेताओ को खुद की सरकार द्वारा नीचा दिखाने का पूरा प्रयास किया गया।
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आज विकास दुबे को जिस तरह हीरो बनाया जा रहा है वह लाजमी है , क्योंकि इसके पहले फूलन देवी जी के हत्यारे को भी हीरो बनाया गया। सरेआम शेर सिंह राणा नामक हत्यारा अपनी जाति के नाम पर हीरो बनता रहा। जेल से फरार होने के बाद भी स्वजातीय सभाओं में भाषण देता रहा। पृथ्वीराज चौहान के अस्थियों को लाने के ढोंग का प्रपंच रचने वाले शेर सिंह राणा के ऊपर अगर अब फिल्म बनने जा रही है , तो फिर विकास दुबे का हीरो बनना लाजमी है । क्योंकि हम और आप लोग जाति के नाम पर इन हत्यारों और आतंकवादियों को हीरो बना देते हैं।
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राजनीति के खेल के सबसे धुरंधर खिलाड़ी। जिसके दावपेच और समीकरण के आगे किसी की नही चली। वो राजनेता जिसने राजनीति के सभी मोहरों को जब चाहा जैसे चाहा वैसे चला। वो पहलवान जो न तो अखाड़े में चित्त हुआ और न ही कभी राजनीति में चित्त हुआ। रुतबे और रुबाब का वो व्यक्तित्व जिससे आंखे मिलाने मे विरोधी भी अपना सम्मान समझे। वो नेता जो कब क्या दाव चलेगा इसका अंदाजा राजनीति के बड़े बड़े चाणक्य भी नही लगा पाए। नन्हे नेपोलियन का वो संघर्ष जिसको समझने की हैसियत किसी मे नही।वो मुलायम ही है जिन्होंने यूपी को कांग्रेस के लिए बुरा सपने जैसे बना दिया।
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बचपन मे हर किसी को माँ ने बताया होगा कि भगवान की पूजा करो , धर्म को मानो , भगवान और धर्म तुम्हारी रखा करेंगे। जैसे बड़े हुए तब हमे ये बताया जाता है कि धर्म और भगवान संकट में है, हमे उनकी रक्षा करनी है। यकीन मानिए आपने जिस दिन धर्म पर ऑंख मूँद कर विश्वास करने की जगह सवाल जवाब करना शुरू करेंगें ऐसे लोगो की दुकानें भी बंद हो जाएंगी।
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सरकारी तंत्र में ऑडिट का महत्वपूर्ण रोल है। ऑडिट के माध्यम से ही पैसे का या शक्तियों का उपयोग सही हुआ है या नही इसका पता लगाया जा सकता है। लेकिन अगर आपको पता चले कि किसी राहत कोष ,जिसमे जनता बड़े पैमाने पर दान देती है , उसकी ऑडिट नही की जा सकती तो आप उसके पीछे छुपी हुई किस तरह कर मंशा की कल्पना करेंगे ? मतलब आप जनता के पैसे अपनी मर्जी से खर्च करें और उसका कोई हिसाब न देना हो। अब पीएम केयर्स को कैग ऑडिट से बाहर कर क्या सरकार भ्रस्टाचार ने नए दरवाजे और नए अवसर नही खोल रही है ?
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महराष्ट्र का पालघर इस लिए हुआ, क्योकि रकबर खान के हत्यारों को फूल पहना कर स्वागत किया गया, इस्पेक्टर सुबोध के हत्यारों को राजनीतिक और सत्ता की शह देकर बचाया गया। शंभू लाल रेगर जैसे आतंकी हत्यारे को हीरो बनाने की कोसिस की गई, अखलाक की हत्या को जायज ठहराया गया। स्वामी अग्निवेश की पिटाई को सही बताया गया। जब खुद सत्ता ने ऐसे अपराधियो को बढ़ावा दिया तब ऐसे अपराधियो का हौसला बढ़ा गया, उनके अंदर का डर समाप्त हुआ और ये भस्मासुरी हत्यारो ने अब निर्दोष संतो की हत्या कर दी। और अभी ये इन हत्यारो को रोका नही गया तो न जाने ये हत्यारे किसको अपना निशाना बनाएंगे।
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