चाँद देखने के बहाने तेरा दीदार करता हूँ

इन गुलो में इन बागों में ख्वाब ए आसार करता हूँ
मैं  चाँद  देखने  के  बहाने   तेरा  दीदार  करता हूँ

आशिकी,मोहब्बत,अर्जियां,दीवानगी, नादानियां 
मैं  बस तेरे ही खातिर ये सारे कारोबार करता हूँ

एक  रोज तू भी  मेरे  लिए  दवा  ले कर आएगी
बस  इसी  उम्मीद मे, मैं खुद को बीमार करता हूँ

रूठना  भी  तुमसे, मनाना  भी  सिर्फ तुम्ही को
हा यही वाली मोहब्बत मैं तुमसे सौ बार करता हूँ

किसी दिन तू मुझको छोड़ के गयी थी जिस जगह
मैं आज भी उस मोड़ पे खड़ा तेरा इंतेज़ार करता हूँ

परायी  तो  हो पर, बहुत  अजीज हो तुम मुझको
अगर ये गुनाह है तो ये गुनाह मैं बार बार करता हूँ


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