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कुतर्की समाज का परित्याग

फैमिनिजम

प्राइवेट कंपनियां सीधे डूब रही है और सरकारी कंपनियां सीधे बिक जा रही है। इस दोनों में एक वाकया एक है, प्राइवेट कंपनियां वही डूब रही है जो अम्बानी या अडानी को टक्कर दे रही है , और सरकारी कंपनियां जितने भी बिक रही है सबकी खरीदारी की रेस में अम्बानी और अडानी  आगे है।मतलब साफ कह तो एसेट्स बिकम्स लाईबीलिटीज , एंड लाईबीलिटीज बिकम्स अम्बानी की एसेट्स वाला हिसाब किताब चल रहा है। देश अब शायद वापस ग़ुलामी के उसी दौर में जा रहा है जहाँ आपका हक़ अपनी ही चीजो से छीन लिया जाता है।

हँसी का गुमान

मंजिल मंजिल ढूंढे राही

"सरदार जी आपको अब आना ही होगा" सरदार भगत सिंह जी को मेरा पत्र।

वो कहावत पुरानी है, नालायक औलादे अपने पुरखों की अर्जित की हुई संपत्तियां बेच कर अपना गुजारा करती है।कुल मिलाकर ये एक ऐसी फिल्म थी जिसकी कहानी का पता नही था, सिर्फ एक जबरजस्ती बनाई गई नायिका थी। फ़िल्म का मैसेज समझ नही आया। फ़िल्म का स्क्रीनप्ले, स्क्रिप्ट, लोकेशन सब गायब था। फिर भी जबरजस्ती ये फ़िल्म सबको दिखाई गई । और खासियत ये बताई गई कि फ़िल्म की घोषित नायिका ने लगतार ढाई घंटे तक पेपर देख कर डायलॉग बोला।

तेरे जुल्मो से डर कर भागे , सरदार भगत की पीढ़ी इतनी बुजदिल नही ये छात्र एक शक्ति है गुर्राते नाहर की, तेरे जैसे कायर की ये महफ़िल नही।

"हिंदुस्तान किसी के बाप का थोड़ी है" जनाब राहत इंदौरी ने जो लिखा वो सिर्फ शायरी न होकर देश के न जाने कितने लोगों के अंतरात्मा की आवाज है, ये वो लोग है जिन्हें हर दिन अपना प्यार अपने वतन के लिए सिद्ध करना पड़ता है, एक गुंडा मव्वाली भी इसने ये सबूत मांगता है, ये वो लोग है जिन्हें हमेशा पाकिस्तान जाने की सलाह दी जाती है। ये वो लोग है जिन्होंने बंटवारे के समय आने धर्म के नाम पर बने देश मे जाने की जगह इसी मुल्क में रह कर इसी मुल्क की मिट्टी में दफन होना मंजूर किया। शायद उनको उस वक़्त आज के इस हालत का अंदाजा नही रहा होगा। वो तो गांधी और नेहरू के सपनो वाले भारत की कल्पना में यहाँ रुके, देश और मातृभूमि में रहना पसंद किया।

गांधी वह है , जिसकी तारीफ करके भी लोग ऊँचाई तक पहुचे, और उसकी बुराई और हत्या करके भी लोग भारत में सत्ता तक पहुँचे। गांधी भारत की पहचान है। गांधी भारत की शान है। गांधी भारत के लोगो का नाम है। गांधी वो जो सच पर डिग कर घमंड , असत्य, तानाशाही, और अत्यचार को संवेदनशीलता के साथ खत्म करे। सरदार भगत सिंह ने गांधी के बारे में कहा " गांधी सच मे देश के नायक है ,उन्होंने सारे देश को आज़ादी के लिए एक छत्र के नीचे लाया । आज गांधी की ही वजह से सारे देश मे आज़ादी के लिए का बिगुल बजा हुआ है" गांधी ने लोगो को बताया कि "असली भारत कलकत्ता और दिल्ली के कुछ वकील नही बल्कि देश के सत्तर हजार गांव से देश बनता है" और गांधी ने सच मे उन्ही लोगो की लड़ाई लड़ी।  आज भी देश मे गाँधी को गाली देने वालो के नेता विदेशो में उन्ही गांधी के नाम का ढिंढोरा पीट कर सम्मान खाते है।

आस्था अगर तर्क के प्रहार से टूट जाये या बिखर जाए तो वो आस्था नही अंधविश्वास होगा। और ऐसी आस्था का खत्म होजाना ही बेहतर है जो तर्कों को सहन करने की क्षमता न रखती हो। आस्था के सारे पहलुओं को अपने कसौटी ओर तौलो, और अगर वही खरी नही उतरती तो यदि उसे खुद भगवान ने आकर बोला हो तो भी मानने से इनकार दो। - सरदार भगत सिंह जी