परदा डाला नही जाता

निगाह ए शमशीर के साये से दिल निकाला नही जाता
लाख  कोसिस करके   इस बला को टाला नही जाता

एक तू है बावरें,जिसने हज़ारो आफत संभाले रखी है
एक वो है जिनसे आपना आँचल  संभाला नही जाता

खुदा के लिए छोड़ दो तुम अब ये परदेदारी  की  रश्में
आब ए चश्म का ये रोग अब हमसे पाला  नही जाता

उनकी सरपरस्ती पाके फरिश्तो ने  भी की है बगावत
अब खुदा से  हुस्न ए नूर  पर  परदा डाला नही जाता

किसी का हाथ पकड़ना,किसी के कांधे पे  सर रखना
कोई समझाये उन्हें,ऐसे दिलों को उछाला  नही जाता

यूँ  तो  मैं तेरे खुदा की   तस्बीह  कर  भी लूं मुरशिद
पर मेरे  हाथ  से उसके नाम  का  प्याला नही  जाता


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