वो लड़की
वो लड़की —
जो अक्सर खामोशियों से बातें करती है,
लफ्जो से ज़्यादा उसकी आँखें कहती हैं।
चेहरे पर उसके अमल की सादगी का उजाला है,
और आँखों ने गहराई में कोई समंदर संभाला है।
मासूमियत उसके हाव-भाव में घुली हुई,
जैसे सुबह की ओस, पत्तों पे ठहरी हुई।
कभी मुस्कुरा दे तो लगता है वक़्त ठहर गया,
और जब गुमसुम हो जाए — तो यूं लगे,
की आज चांद अपने फलक से उतर गया
वो कम बोलती है, मगर लफ़्जो का असर छोड़ जाना
उसकी नज़र से नजर मिलना, और सज़र छोड़ जाना
खोई खोई सी रहती है, पर उसमें कुछ खोया नहीं,
उस नाज़नी के खयालों में मैं अजल से सोया नहीं।
वो लड़की —
जो जब भी दिखती नहीं,मुझे महसूस होती है,
हर दिल के किसी कोने में चुपके से बसती है।
नाजुक सी, लेकिन गहराई में समंदर छिपाए हुए,
वो लड़की — जिसे समझना, खुद को समझने जैसा है। 🌙✨
BR

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