लहू से लथपथ पैरों को फिर भी आगे बढ़ना होगा।



लहू से लथपथ पैरों को फिर भी आगे बढ़ना होगा।
जो जो देखे सपने तूने अब सबको सच करना होगा


काँटों पर चलना होगा, ज्वालाओं में जलना होगा,
विकट स्थिति होगी, पर कठिनाई से लड़ना होगा।
विजयश्री का ये पथ मिलेगा कभी आसान नहीं,
लहू से लथपथ पैरों को फिर भी आगे बढ़ना होगा।

तूफान बन बदल बरसेंगे,पथिक की राहों को रोकेंगे
बिजलियाँ गिरेंगी, स्वजन भी तेरे  सपनों को टोकेंगे।
अब हर मुश्किल हर पीड़ा में तुझे बस ढालना होगा
लहू से लथपथ पैरों को  फिर भी आगे बढ़ना होगा।

जो रुका, जो झुका, वो अधूरे स्वप्न संग मिट जाएगा,
बिना लड़े, बिना डटें इतिहास कहां फिर तू बनाएगा।
अंधड़ के छोटे सहनी होंगी, बनके दीप जलना होगा
लहू से लथपथ पैरों को फिर भी आगे बढ़ना होगा।

हर घाव तेरा गौरव होगा, हर पीड़ा सम्मान बनेगी,
लहू से लिखे पथ की गाथा, जग में पहचान बनेगी।
संघर्ष की इस ज्वाला में,तुझको खुद भी तपना होगा,
लहू से लथपथ पैरों को फिर भी आगे बढ़ना होगा।

रणभूमि में हार नहीं, बस विजय की ही भाषा होगी,
हर दर्द, हर आँसू तेरे, तेरे ताकत की परिभाषा होगी।
लक्ष्य की इस ऊँचाई तक, हर हाल में पहुँचना होगा,
लहू से लथपथ पैरों को फिर भी आगे बढ़ना होगा!

अश्रु, स्वेद, रक्त बहाकर, विजय तुझको पानी होगी,
लहू से लिखे इस संघर्ष की, गाथा अमर कहानी होगी!
बढ़ता चल,गिरता चल, पर रुककर न थमना होगा
लहू से लथपथ पैरों को फिर भी आगे बढ़ना होगा।

लहू से लथपथ पैरों को फिर भी आगे बढ़ना होगा।
जो जो देखे सपने तूने अब सबको सच करना होगा

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