मेरे महबूब को आंखों से शिकार करना आता है
बिना खंजर बिना शमशीर के वार करना आता है
मेरे महबूब को आंखों से शिकार करना आता है
जो भी उसकी गली से गुजरा, बावरा हुआ है इलाही
उसको बिना जादू टोने के भी बीमार करना आता है
इस तरह इश्क़ के फैसले आर पार करना आता है
उसे तकरार करना आता है,हमे प्यार करना आता है
तर्क ए उल्फत में उनसे क्या ही जिरह करें इलाही
उन्हें अपनी नज़रो से हमे ज़ार ज़ार करना आता है
न इनकार करना आता है न इज़हार करना आता है
मेरे महबूब को मुझसे कुछ ऐसे प्यार करना आता है
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