तुम मेरे लिए क्या हो

जैसे किसी फकीर की जुबां से निकली दुआ हो
या  कड़कती  धूप  में  छाव  भरी  कोई  सरा हो
ये मुमकिन ही नहीं की तुम्हारी जरूरत बता सकूं
ये मेरा खुदा जानता है की तुम मेरे लिए क्या हो

तुम आती हो तो सारे मौसम तुम्हारे साथ आते है।
हर बगवां खुश होता है,और हर फूल मुस्कुराते है।।
ये चांद भी शरमा कर इन  बदलो में छुप जाता है।
ढलता सूरज भी तेरे दीदार  खातिर रुक जाता है।।
तुम होती हो जाना तो सारे नगमे  सुहाने लगते है।
कलियां गीत गाती है,ये भवरें तेरे दीवाने लगते है।।
बहुत हसीन लगती है खुली जुल्फों  में तेरी अदा।
ना कोई मिलावट तेरी सादगी में,है ना कोई कजा़।।
है संगेमरमर सी तराशी तेरी बदन की नक्काशी।
गुलों सा तेरा खिलना,ये तेरी आंखे प्यासी प्यासी।।
जो मेरे होठों को तर कर जाए तुम वो मैकदा हो।
या मेरे  इस मर्ज के इलाज की आखिरी  दवा हो।।
ये मुमकिन ही नहीं की तुम्हारी जरूरत बता सकूं।
ये मेरा  खुदा जानता है  की तुम मेरे लिए क्या हो ।।


हां जब तुम आती हो जाना सारे तार छिड़ जाते है।
क्या सूरज क्या चंदा तेरे दीदार को सब मिल जाते है।।
मैं भीड़ की आखिरी कतार में खड़ा तुझे निहरूंगा।
हैसियत नही होगी मेरी मैं फिर भी तुझको चाहूंगा।।
जब तक हूं तुम्हारी गली के रास्ते मैं आबाद रखूंगा।
चाहे ये जहाँ सारा भूल जाऊं,एक तुझे याद रखूंगा।।
एक बस ये तेरा ही  चेहरा एक बस ये तेरी ही बाते।
वो इंतजार भरे मेरे दिन वो सिसकती सी सारी रातें।।
इन सारे  ख़ज़ाने की तुम  एकलौती  मेरी  अता हो।
या मेरा पीर हो या मेरा मुरशीद या तुम ही खुदा हो।।
ये मुमकिन ही नहीं की तुम्हारी जरूरत बता सकूं।
ये मेरा  खुदा जानता है  की तुम मेरे लिए क्या हो ।।

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