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सीबीआई की मजबूरी हम इस तरह भी समझ सकते हैं कि एक बड़े आदमी के यहां चोरी हुई और चोरी का शक एक बड़े थाने के एक बहुत बड़े कोतवाल के ऊपर गया । अब नियम के मुताबिक उस कोतवाल ने एक जांच कमेटी बनाई जिसमें उसने कुछ जूनियर अफसरों को रखा , और खुद के खिलाफ दर्ज मुकदमे की जांच करने के आदेश दिए। और उस जांच की सारी देख रेख भी उस कोतवाल ने अपने ही पास रखी । और जब रिपोर्ट आई तो पता चला कि कोतवाल साहब निर्दोष है। और चोरी हुई सामान खुद-ब-खुद घर से भाग गई।या उन सामानों का घर से मन भर गया था। वह सामान घर में रहने नहीं चाहती थी । फिर कोतवाल ने हर जगह से चोरी करनी शुरू कर दी। और वह जब जब चोरी करता और उसके खिलाफ शिकायत जाती तो वह वही कमेटी बना देता ।और कमेटी डरा धमका कर लोगों को चुप करा देती ,और कोतवाल को बाइज्जत बरी कर देती थी।

अगर आपको इंसान की मौत से ज्यादा जानवरो की मौत पर गंभीर होने वाले पसंद आ रहे है तो यकीन मानिए आपकी संवेदनाओं की हत्या उस आदमी ने कर दिया है। अगर आपको लीनचिंग की समस्या से देश को अवगत कराने वाले देशद्रोही लगते है तो यकीन मानिए आप लीनचिंग में शामिल हत्यारो के प्रबल समर्थक है। अपनी सोच को जबरजस्ती दूसरो पर थोपने का ट्रेंड चल चुका है। जो हमारी सोच से इत्तेफाख नही रखे उसे देशद्रोही साबित करने का ट्रेंड चल चुका है। जो भाजपा और मोदी जी के गलत नीतियों का विरोध करे उनको , मालवीय जी की सेना के द्वारा गद्दार साबित करने का ट्रेंड चल रहा है।